बुधवार, 6 अप्रैल 2016

क्या कहां खो रहा है




एक 100 रुपये का नोट एक ज़िंदगी पर  भारी पड़ गया । बचपन में
ओ हेनरी की कहानियां सबने पढ़ी होंगी । इंसानी जज्बे और दुनियावी ज़रुरतों
के ताने बाने से लिपटी कहानियां । जहां अपनी प्रेमिका के खूबसूरत बालों
के लिए कंघी गिफ्ट करने के लिए प्रेमी अपनी सबसे प्यारी चीज़ बेच देता है तो पता
चलता है कि उसे गिफ्ट देने के लिए उल्टे प्रेमिका ने ही अपने बालाों की कुर्बानी
दे दी । भावनाएं छोटे भौतिक सुखों से कहीं आगे चलीं जाती हैं । कल्याणपुरी के
शिवम को अब ये बात समझाई नहीं जा सकती कि भावनाओं के
आगे भौतिक चीज़ों का कोई मोल नहीं । 18 साल का शिवम अब इस दुनिया में नहीं है ।

18 साल के एक लड़के ने अपने घर की पहली मंजिल पर जा फांसी लगा ली ।
वजह बनी महज एक 100 रुपये का नोट । शिवम को 100 का वो नोट उसके पिता ने दिया था , किसी काम के लिए। उस 100 के नोट में शिवम ने शायद खुद को ही खो दिया । सवाल ये कि उसकी मौत की वजह
क्या थी । 100 रुपये के नोट की शक्ल में पिता का डर ।
या फिर इस पीढ़ी का वो उलझाव जो कभी किसी प्रत्यूषा या फिर
कभी हरियाणा की उन दोनों बहनों की खुदकुशी की शक्ल में सामने आता है जिन्होंने
नौकरी न मिलने की वजह से खुदकुशी कर ली । ज़िंदगी खत्म करना जीने से ज्यादा आसान क्यों
होता जा रहा है । नई पीढ़ी जीने से पहले ही जीवन के आखिरी पड़ाव पर क्यों जा रही है ।
सोचना होगा सबको ।

1 टिप्पणी:

  1. प्रिय मित्र,
    नमस्कार !!
    आपका ब्लॉग पढ़ा । आपको हिंदी के एक सशक्त मंच के सृजन एवं कुशल संचालन हेतु बहुत-बहुत बधाई !!!
    खास बात ये है की आपके हर आर्टिक्ल मे कुछ नयी और बेहद रोचक जानकारी होती है ।
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    संजना पाण्डेय
    शब्दनगरी संगठन
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